वेद, हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व,पुस्तक मेले से लेते आइये

image

यह किताब अंग्रेज़ी और बांग्ला में 2005 में ही आ गई थी। कुमकम रॉय, कुणाल चक्रवर्ती और तनिका सरकार ने मिलकर लिखा है। इसकी भूमिका रोमिला थापर ने लिखी है। अंग्रेज़ी में इसे HEINRICH BOLL FOUNDATION ने छापा था और बांग्ला में एबंग आलाप ने छापा है। इसकी कीमत 150 रुपये है। हिन्दी वाली किताब मात्र 45 रुपये की है। 2010 में ही एकलव्य प्रकाशन ने इसका हिन्दी अनुवाद छाप दिया था। मगर पाठकों तक इसकी सूचना पहुंची ही नहीं। स्वयं प्रकाश ने अनुवाद किया है। हमने दो चार मित्रों को अंग्रेज़ी वाली किताब तोहफे में दी मगर उन्होंने कभी पढ़ा नहीं। कई मित्र अक्सर पूछते रहते हैं कि वेद क्या है। इंजीनियरिंग,मेडिकल,साहित्य के छात्रों के अलावा वे सभी जो पिछले बीस पचीस सालों से नौकरी में आने के बाद सैलरी के अलावा किसी चीज़ के छात्र नहीं हैं। चिन्ता मत कीजिए। इतिहास के विद्यार्थियों को भी नहीं पता और राजनीति के मंच से इसकी ठेकेदारी करने वालों को भी कम ही पता है। सबको एक दो बातें पता हैं, बस उसी को लेकर ताने रहते हैं।

आर्यों के आगमन से संबंधित विवाद,वेद क्या हैं, वैदिक संस्कृति या साहित्य क्या है, धर्म का निर्माण कैसे होता है,इसकी राजनीति इसे कैसे बदलती है, इस पर जटिल से जटिल किताब लिखे गए हैं। यह किताब स्कूली बच्चों के लिए लिखी गई किताब की तरह है। आपको बेसिक का पता चल जाता है। संघ और वामपंथ के बीच इन बातों को लेकर घमासान बहस होती है। वर्ण और जाति को लेकर इतनी बहस होती है मगर कई लोगों को अंतर नहीं पता। हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व में गहरा अंतर है जिसे लेकर अक्सर मीडिया में विवाद होते रहता है। लेख छपते रहते हैं। एक बुनियादी समझ के लिए यह किताब आपकी मदद कर सकती है। 45 रुपये में और क्या चाहिए आपको। 90 पन्नों की इस किताब को पढ़ा जाना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े लेखक भी इन मसलों पर काफी लिखते रहते हैं बल्कि ऐसे पेश करते हैं कि जैसे उन्हीं का एकाधिकार हो। सत्ता के आधार पर अपनी बात को अंतिम बात साबित करने की शक्ति प्राप्त कर लेते हैं। पर सामान्य पाठक को सबको पढ़ना चाहिए। बहुत पढ़ने का वक्त नहीं होता मगर आप हिन्दी के अखबारों के हवाले ख़ुद को मत छोड़िये। आपको ये अख़बार मर्दाना ताकत की दवा के ग्राहक में बदल देंगे। इसलिए आप जब पुस्तक मेले जायें तो हॉल नंबर 12 में सुरुचि प्रकाशन ज़रूर जाइये। वहां से भी वैकल्पिक सामग्री ख़रीद लाइये। एकलव्य का स्टॉल हाल नंबर 18 में है। डरिये नहीं। सबको पढ़िये। इस कसौटी पर कसते चलिए कि कौन सी पुस्तक आपको बेहतर मनुष्य बनने में मदद करती है, कौन सी ज़हर भरती है। एक को सीने से लगा लीजिए,दूसरे को फेंक दीजिए।

image