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  • चुनाव से पहले अपने आप से हारता बिहार

    चुनाव से पहले अपने आप से हारता बिहार

    राजनेताओं में साहस नहीं रह गया है। इनके अनैतिक गठबंधनों ने धर्मनिरपेक्षता को ही दाग़दार कर दिया है। जिसका लाभ उठाकर सांप्रदायिक शक्तियां खुद को नैतिक घोषित कर रही हैं। कोई हिंसा और अविश्वास की राजनीति का समर्थन कैसे कर सकता है। आम लोग इसके ख़िलाफ़ बोल सकते थे मगर सबकी अपनी अपनी जाति है। जाति के कारण उनका पार्टीकरण हो गया है।