में तैनात लेख " बंगाल " श्रेणी

  • भारत में नाव पत्रकारिता की शुरूआत हो

    भारत में नाव पत्रकारिता की शुरूआत हो

    नावों के निर्माता कौन होते होंगे ? उन्होंने नावों का विज्ञान कहाँ से सीखा होगा ? लकड़ी की नावें महिंद्रा या सुज़ुकी की नहीं होतीं फिर भी इनके ग्राफिक्स डिज़ाइनरों की तैयार कारों से बेहतर होती हैं । कभी नाव को छूकर देखियेगा । काठ होते हुए भी पत्थर की बनी लगती हैं । नावों के निर्माताओं का कोई नाम नहीं जानता मगर समंदर किनारे इनकी बनाई नावें नज़र न आए तो समंदर और नदी का ब्रांड फीका हो जाए ।


  • कलि कथा वाया चाय-पास

    कलि कथा वाया चाय-पास

    चाय भारत का ‘ राष्ट्रीय रास्ता पेय’ ( नेशनल स्ट्रीट ड्रिंक ) है । किसी नुक्कड़ पर चाय की दुकान न मिले तो लगता है कि यहाँ आबादी ही नहीं है । और हाँ दाम के मामले में कोलकाता काफी सस्ता है । चार से पाँच रुपये में दूध चाय मिल जाती है । तीन रुपये में लीकर चाय । दिल्ली में आपको दूध चाय के आठ से दस रुपये देने पड़ते हैं ।


  • बंगाल में बीजेपी आ रही है या नहीं

    बंगाल में बीजेपी आ रही है या नहीं

    तृणमूल के सामने विपक्ष का जो विशाल खाली मैदान पड़ा है उसे समेटने का संसाधन और संगठन जिसके पास है वो जगह बना लेगा । बीजेपी के पास संसाधन और संगठन की कोई कमी नहीं है । लेफ़्ट भी इस बात को समझ रहा है तभी कई वामदलों जनता परिवार की तरह एकजुट हो रहे हैं लेकिन स्लोगन और पोस्टरबाजी के मास्टर लेफ़्ट के नेताओं को मैं नहीं बताना चाहता । हो सके तो आप बता दीजिये कि अच्छे दिन का वादा ममता ने नहीं मोदी ने किया है ।