में तैनात लेख " नीतीश कुमार " श्रेणी

  • बीजेपी : ‘जय श्री राम’ से जीतन राम तक

    बीजेपी : ‘जय श्री राम’ से जीतन राम तक

    दरअसल बिहार की राजनीति में जो हो रहा है, उसे आप किसी की साइड लेकर जायज़ नहीं ठहरा सकते हैं। जेडीयू से लेकर बीजेपी तक सबकी दलीलें सत्ता के उस खेल को सही साबित करने में लगी हैं, जिसकी एकमात्र उपलब्धि मिल जाने भर में है। चूंकि बीजेपी नई राजनीति की बात कर रही है, इसलिए जवाबदेही उसकी भी बनती है। मांझी को समर्थन देकर बीजेपी को क्या मिला, यह तो चुनाव में पता चलेगा।


  • बिहार की बिसात में मांझी की नैया

    बिहार की बिसात में मांझी की नैया

    नैतिकता और न्याय सियासत में कब पाखंड है और कब प्रतीक यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप नीतीश को पसंद करते हैं या नरेंद्र मोदी को या फिर मांझी को। आखिर बीजेपी मांझी का साथ क्यों दे रही है? महादलित की चिंता थी तब बीजेपी ने मांझी के सीएम बनने पर स्वागत क्यों नहीं किया। क्यों कहा कि ये कठपुतली मुख्यमंत्री है। हर दिन मांझी पर हमला हुआ। पर इस बीच मांझी कैसे बीजेपी के करीब पहुंच गए। इस पोलिटिक्स को आप केमिस्ट्री की क्लास में समझना चाहते हैं या कॉमर्स की।


  • हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है !

    हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है !

    मुझे लगता है मोदी तब भी बोल रहे होते हैं जब वे नहीं बोलते। पता नहीं उन अलग अलग कमटियों या कमेटी का क्या हुआ जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की तैयारी के लिए बनाया गया था। उल्टा यही हुआ होगा कि ये कमेटी मोदी से बोलने का ट्यूशन लेकर लौट गई होगी। बिना बोले जो लोग राजनीति करना चाहते हैं उन्हें एक काम करना चाहिए। मोदी की टीम में शामिल हो जाना चाहिए जहां सबको चुपचाप काम करना पड़ता है। उनको प्राण पर फिल्माया गया वो गाना गाना चाहिए। हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है। हम कुछ नहीं बोलेगा साब जी।