में तैनात लेख " आम आदमी पार्टी " श्रेणी

  • अरविन्द केजरीवाल की पत्रकारिता पर लगाम लगाने की कोशिश?

    अरविन्द केजरीवाल की पत्रकारिता पर लगाम लगाने की कोशिश?

    ये मानहानी की रंगदारी है या मीडिया को जवाबदेही का ख़ौफ़ पैदा करना। आप अच्छा काम कर सकते हैं तो क्या किसी अच्छे व्यक्ति को यह अधिकार दे दिया जाए कि वो दूसरों को अच्छा काम न करने दे। अगर पत्रकार को कानून का डर दिखायेंगे तो वह जोखिम उठाकर किसी खबर को उजागर करने का अच्छा काम कैसे करेगा। ये बेसिक कोच्चन है।


  • आम आदमी पार्टी के आशुतोष को रवीश कुमार का खुला पत्र

    आम आदमी पार्टी के आशुतोष को रवीश कुमार का खुला पत्र

    अच्छा किया जो आपने माफी मांग ली पर क्या आप यह भी बता सकते हैं कि माफी मांगने लायक बयान देते वक्त आप किस मनोदशा से गुज़र रहे थे। गजेंद्र की आत्महत्या से तो आप भी काफी दुखी होंगे फिर दुख के समय ऐसे तेवर वाले बयान कैसे निकल गए। क्या आपको गुस्सा आ गया कि आत्महत्या को लेकर आपके नेता को घेरा जा रहा है।





  • आप में ये कलह और व्यक्तिगत हमले क्यों

    आप में ये कलह और व्यक्तिगत हमले क्यों

    अरविंद ने ट्वीट किया है कि पार्टी में जो कुछ भी चल रहा है उससे मैं बहुत आहत हूं। बस यह नहीं साफ हुआ कि वे किससे आहत हैं। योगेंद्र-प्रशांत के बयानों से या आशुतोष आशीष और दिलीप के बयान और ट्विटर पर किये गए योगेंद्र-प्रशांत पर व्यक्तिगत हमलों से। वैसे पत्रकार का स्टिंग और पत्रकार का सोर्स बताना दोनों सीरियस मामला है।


  • क्या अब आप साथ नहीं हैं ?

    क्या अब आप साथ नहीं हैं ?

    दिल्ली की राजनीति हैरान है। जिस दल को 67 सीटों का ऐतिहासिक समर्थन दिया उस दल के दो नेता महीना भर भी साथ नहीं रह सके। यह भी एक इतिहास ही होगा। राजनीति ऐसे इतिहासो को जल्दी हजम कर जाती है। लेकिन क्या यह लड़ाई भी भुला देने वाले इतिहास की एक और किताब है या कुछ और। बस लोग वही पुराना सवाल ज़रूर पूछेंगे कि आप दूसरों से अलग कैसे। क्या इसलिए कि आसानी से अलग हो जाते हैं।


  • दिल्ली की सियासत में आप का डंका

    दिल्ली की सियासत में आप का डंका

    आप की जीत भावुकता तो पैदा करती है, मगर जीत के इन्हीं क्षणों में दिल्ली के लोगों की उस तकलीफ को भी याद करना चाहिए, जिसे वह रोज़ भुगत रहे हैं। जिनकी दुनिया में पानी और बिजली नहीं है उन्हें न जाने किस वर्ल्ड क्लास सिटी का सपना दिखाया जा रहा है। यही सवाल है कि क्या आम आदमी पार्टी और केंद्र की सरकार मिलकर इस दिल्ली को बुनियादी सुविधाएं दे पाएंगी। जहां लोगों के पास घर और कार तो है मगर शौचालय नहीं है। आपने कहीं ऐसा देखा है कि घर में कूलर है, एसी है, स्मार्ट फोन है मगर शौचालय नहीं है। इसके लिए आपको मैड्रिड या मॉस्को जाने की ज़रूरत नहीं है, मदनपुर खादर चले जाइये।


  • मिस्ड काल मेंबरी- एक नंबरी या दस नंबरी

    मिस्ड काल मेंबरी- एक नंबरी या दस नंबरी

    मिस्ड कॉल की सदस्यता के बारे में समझ साफ होनी चाहिए। क्या मिस्ड कॉल वाले सदस्यों को पार्टी के आंतरिक चुनावों में मतदान करने का अवसर मिलेगा। अगर वे पार्टी से किसी तरह नाराज़ हुए तो मिस्ड कॉल से ली हुई सदस्यता कैसे वापस करेंगे। क्या वह एक बार मिस्ड कॉल देने से हमेशा के लिए सदस्य बन जाएगा।


  • दिल्ली किससे लड़ेगी

    दिल्ली किससे लड़ेगी

    काला धन और भ्रष्टाचार का मुद्दा अब लतीफ़े में बदल गया है। लोकपाल का जुनून उस शामियाने की तरह उजड़ गया है जिसके भीतर कुर्सी कहीं से आई थी और लाउडस्पीकर कहीं से। सब अपना-अपना सामान लेकर चले गए हैं। इस आंदोलन ने राजनीति में कई नायक दिये। ये और बात है कि इनका नायकत्व किसी और नायक में विलीन हो गया। अब हर दूसरा तीसरा टुटपुंजिया आंदोलन भी आज़ादी की दूसरी लड़ाई कहा जाने लगा है।