सरदार के शौक

“पप्पाजी कलकत्ता में दांत के डाक्टर बने थे। कलकत्ता के जीवन में एक ऐसा भद्र वर्ग,जिसके ऊपर अंग्रेज़ी का प्रभाव आज भी है। कलकत्ता में जवानी बिताई, अभ्यास किया। डाक्टर के रूप में राजकोट वापस आकर व्यवसायिक जीवन आरंभ किया। राजकोट में भी कलकत्ता की जवानी की छाया झलकती थी। पश्चिमी रंगका असर दिखे बिना नहीं रह सका। शाम को क्लब का कल्चर, ताश खेलना और सिगरेट के धुएं में ज़िंदगी हरी भरी रहती। सरदार पटेल की ज़िंदगी में ज़रा झांककर देखें तो ऐसा ही कुछ देखने को मिलेगा। वकील का व्यवसाय, बार में बैठना, क्लब में साथियों के साथ ताश खेलना, सिगरेट के घुएं में आज़ादी के दीवानों का मज़ाक उड़ाना, महात्मा गांधी के प्रति भी मज़ाक में कभी-कभी बोलना। सरदार पटेल के जीवन का यह स्वाभाविक क्रम था किन्तु महात्मा गांधी के स्पर्श ने सरदार पटेल का जीवन बदल दिया।”

ऊपर जो आपने पढ़ा इसे लिखने वाले नरेंद्र मोदी हैं। प्रधानमंत्री बनने से पहले उनकी एक किताब आई थी ज्योति पुंज। हिन्दी में इसका अनुवाद संगीता शुक्ला ने किया है। प्रभात प्रकाश ने छापा है। चुनाव से पहले यह किबात आई थी । इसके बारे में पहले भी लिख चुका हूं लेकिन रामचंद्र गुहा की किताब भारत गांधी के बाद पढ़ते हुए लगा कि सरदार पटेल के आरंभिक जीवन के बारे में फिर से जिज्ञासा जागी। इस किताब में गुहा नेहरू और पटेल की कुछ आदतों की तुलना कर रहे हैं। सुशांत झा ने अंग्रेज़ी में लिखी किताब का हिन्दी में अनुवाद किया है।

“अपने चरित्र और व्यक्तित्व के हिसाब से पटेल और नेहरू दो अलग अलग ध्रुवों पर खड़े थे। यह रोचक अध्ययन का विषय है। प्रधानमंत्री एक उच्चवर्गीय पृष्ठभूमि के ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे जिनक पिता भी राष्ट्रीय आंदोलन के एक प्रमुख नेता रहे थे। जबकि उनकी सरकार में उनके नंबर दो और उप प्रधानमंत्री पद संभाल रहे वल्लभभाई पटेल एक कृषक जाति से ताल्लुक रखते थे, जिनके पुरखों ने 1857 के सिपाही विद्रोह में हिस्सा लिया था। नेहरू अच्छा भोजन और अच्छी शराब पसंद करते थे, ललितकला और साहित्य के शौकिन थे और उन्होंने पूरी दुनिया की यात्रा की थी। जबकि पटेल शराब-सिगरेट से कोसों दूर थे, शाकाहारी थे और एक कठोर प्रशासक थे जिसके पास खेलने और अन्य शौकों को पूरा करने का वक्त नहीं था।”

अब मैं समझ नहीं पा रहा कि पटेल शराब पीते थे या नहीं। बार जाते थे या नहीं, महात्मा का मज़ाक उड़ाते थे या नहीं। प्रधानमंत्री मोदी की जानकारी का संदर्भ क्या रहा होगा। यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि रामचंद्र गुहा गांधी के संपर्क में आने के बाद के पटेल के बारे में लिख रहे हैं जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने गांधी के संपर्क में आने के पहले के पटेल के बारे में लिखा है। लेकिन रामचंद्र गुहा से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। क्या उन्होंने दोनों के शौक की तुलना करते हुए इस पहलु की कोई गहरी तफ्तीश नहीं की होगी, या फिर मोदी से चूक हो गई है। सरदार पटेल को लेकर मोदी की दावेदारी को देखकर और पटेल के बारे में पढ़ते हुए कई बार लगा है कि मोदी ने पटेल को ठीक से पढ़ा है। लेकिन इतिहास यही बताता है कि पटेल की गांधी में निष्ठा संपूर्ण थी। यहां तक कि जेल में वो इस बात की शिकायत करते हैं कि महात्मा गुसलखाने से अपना कपड़ा धोकर निकलते हैं लिहाज़ा उन्हें बापू का कपड़ा धोने का अवसर नहीं मिल पाता है। गांधी से वैचारिक विरोध करते हुए भी पटेल ने कभी गांधी से किया वादा नहीं तोड़ा। वैसे पहले भी कह चुका हूं। नरेंद्र मोदी की मानस यात्रा को समझने के लिए ज्योति पुंज का पाठ करना चाहिए जिसमें वे सिर्फ उन संघ प्रचारकों के साथ अपनी यादों को साझा कर रहे हैं जो गुजरात में रहे हैं। इस वक्त कहना मुश्किल है कि पटेल के शौक के बारे में कौन सही है। और तफ्तीश की ज़रूरत है। अगर पटेल कभी शराब नहीं पीते थे, कभी बार नहीं जाते थे, कभी सिगरेट नहीं पीते थे तो फिर मोदी ही बता सकते हैं कि उन्हें ये सामग्री कहां से मिली। सुनी सुनाई बातों के आधार पर लिखी या किसी साक्ष्य के आधार पर। इस मामले में राजमोहन गांधी की पटेल पर लिखी जीवनगाथा से मदद मिल सकती है। अगर किसी के पास ये किताब है तो तुरंत सूचित करें। क्या उस किताब में राजमोहन गांधी ने पटेल के आरंभिक जीवन खासकर वकालत के दौर के बारे में कुछ लिखा है या नहीं जब पटेल बार में जाते थे।

इस जानकारी का पटेल के कद से कोई संबंध नहीं है। वो पीते भी होंगे तब भी पटेल पटेल हैं और नेहरू नेहरू। दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। आप इन दोनों की चर्चा किसी एक के बग़ैर कर ही नहीं सकते। पटेल पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर का मतलब ही है नेहरू को पीछे करना और नेहरू पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर का मतलब है पटेल को पीछे करना। पिछले दिनों पटेल की कई चिट्ठियों के बारे में पढ़ा। बिल्कुल स्पष्ट व्यक्ति और अपने तमाम आदरणीयों के बीच अपनी बात कहने का साहस रखने वाले।

फोटो क्रेडिट : युथ की आवाज़ डॉट कॉम