तेहन बेरोजगारी दुनियां में, पांच रुपैये कीलो पीजी

फोन उठाने की आदत से कई बार ख़बरों और जानकरियों के भंडार तक पहुंच जाता हूं। बुधवार को दरभंगा से प्रो झा का फोन आया। पहली बार ही बातचीत हो रही थी, बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर होने लगी। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर और लेक्चरर के 70 फीसदी पोस्ट खाली हैं। बी टेक का बच्चा इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ा रहा है। कोई एम टेक करता ही नहीं है। इस पीढ़ी को शिक्षा से मतलब क्यों नहीं हैं। वो तो पीढ़ी जाने कि उसे नौकरी चाहिए या भाषण। वो एक लाख करोड़ के बुलेट ट्रेन पर फिदा है, मगर नहीं पूछती कि शिक्षा स्वास्थ्य का बजट कहां गया तो मैं क्या करूं। 70 फीसदी पोस्ट ख़ाली हैं तो बिहार के बेरोज़गार युवा ज़रूर फार्वर्ड बैकवर्ड या नहीं तो हिन्दू-मुस्लिम में मस्त होंगे। जगह-जगह किसान, आशा वर्कर का प्रदर्शन चल रहा है। आज का युवा राजनीतिक दल के थर्ड क्लास नेताओं के लिए व्हाट्स अप मेसेज फार्वर्ड कर रहा है तो हम क्या करें। आम तौर पर युवाओं के बारे में ऐसे ही सोचने लगा हूं। प्रो झा दिलचस्प इंसान मालूम हो रहे थे। इतनी आसानी से छोड़ा नहीं। उन्होंने प्राइवेट एजुकेशन पर एक कविता सुनाई। उनके अनुसार जनक जी मैथिली के बड़े कवि हैं। मेरी मातृभाषा भोजपुरी है। मैं भोजपुरी के बाद मैथिली सीखना चाहता था। कोशिश की मगर अब वो भी बीस साल पुरानी बात हो गई। प्रो झा ने जनक जी की कविता का स्क्रीन शॉट भेजा है. बहुत मुश्किल नहीं है आप ध्यान से पढ़ेंगे तो समझ आ जाएगी। व्यंग्य है। मुझे तो बहुत हंसी आई।

तेहन बेरोजगारी दुनियां में, पांच रुपैये कीलो पीजी
तैं न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय नीजी

की करता बैसल बौआ सब, चालू कर पब्लिक पठशाला
पम्पलेट,पोस्टर, स्पीकर, येह तीन टा गरम मसाला
ड्रेस,मेकप आकर्षक चाही, एहन जीविका सब सं ईजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी

सस्त किबात किनए ननै बच्चा, महग किनबियौ तखने चलती
निनानबे सं कम नंबर ने,कतवो रहौ लाखटा गलती
स्वर-व्यंजन बूझै ने बूझै, कैट-रेटा टा हरमद गीजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी

किसिम किसिम फूलक फूलवाड़ी, छछलौआ सीढ़ी आ झुल्ला
लीखो-फेको पुरस्कार दी, लखन गारजन फंसते मुल्ला
भोरे कोचिंग, दिनका टीचिंग, दुन्ना इनकम शुनान पूजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी

की कारण सब नीक-नीक इशकूल शुन्न लागए सरकारी
मेधा प्रतिभा रहितो सबठां अपमानित हो छात्र बिहारी
सबहक आदर साउथ-वेस्ट में, हम्मर बच्चा शुद्ध रिफ्यूजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी

आइ नियोजित टीचर डगमग, दैन्य दशा डगरा केर भट्टा
काल्हि छला ओ खूब मीठ आ आई भेला आमिल सन खट्टा
कुप्प अन्हार टीचरक फ्यूचर, सगरे गाम गुरुकैं भूजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी

अध्यापन टेकनिक केर ज्ञाता, अनुभव, अवलोकन में पक्का
शान्त चित्त सं पढ़ा देता तं, फरजी-सरजी, हक्का-बक्का
गीत कवित्त सभे बिसरी जं, अधपेटू हो रोटी रोजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी

हे गुरुवर वशिष्ठ, सन्दीपन, पढ़ा दियौ ओ पुरना लेशन
दिशा हीन आरत भारत में, सुधरि जैत नवका जनरेशन
कखन पढ़ोत्ता थाकल टीचर, सरकारी लेटर में ब्यूजी
तें न कुकुरमुत्ता सन फड़लै, डेग-डेग विद्यालय निजी