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  • संस्कृत में रचने के कारण विद्यापति को इतिहासकारों ने भुला दिया

    संस्कृत में रचने के कारण विद्यापति को इतिहासकारों ने भुला दिया

    “ लेकिन हम अक्सर भूल जाते हैं कि वो अफ़ग़ान, तुर्की, हब्शी, ताजिक व मध्य एशियाई लोग, जिनकी भागीदारी से सल्तनत की स्थापना हुई और जिनके हाथ में शासन की बागडोर थी, उनमें विविध भाषा-भाषी समूह मौजूद थे। इनमें से बहुत कम लोग फ़ारसी लिख-पढ़ या बोल सकते थे। तात्पर्य यह है कि अगर नये शासकीय लोगों के लिए संस्कृत परायी थी तो फ़ारसी से भी उन्हें कोई व्यक्तिगत लगाव नहीं था।“