मिस्ड काल मेंबरी- एक नंबरी या दस नंबरी

‘छूटी हुई कॉलें’ – जब पहली बार एक मोबाइल सेट पर ‘मिस्ड कॉल’ की हिन्दी देखी थी, तो थोड़ा चकित हुआ था। छूटी हुई कॉलें, यानि वे कॉल, जिसे आप समय पर उठा नहीं सके। लेकिन अब आप किसी राजनीतिक दल के यहां मिस्ड कॉल देकर अपनी सदस्यता उसके यहां छोड़ सकते हैं। आप उसके लिए छूटे हुए ग्राहक नहीं रहेंगे, बल्कि सदस्य बन जायेंगे। मिस्ड कॉल अंग्रेज़ी का वाक्य है, सोच भी है। इसका इस्तमाल अवसर गंवा देने के अर्थ में भी होता है। मिस्ड द बस। हिन्दी में भी मौका गंवा देने के अनेक मुहावरे हैं। मिस्ड कॉल की सुविधा तो सभी फोन में है, लेकिन इसे सस्ते संचार के माध्यम के रूप में भारतीयों ने ज्यादा प्रचलित किया है। मोबाइल फोन ने मिस्ड कॉल को न सिर्फ पैसे बचाने का माध्यम बनाया, बल्कि इसके ज़रिये संवाद हो जाता है। मिस्ड कॉल का एक मतलब यह भी है कि काम हो गया है। उधर से फोन करने की ज़रूरत नहीं है। मिस्ड कॉल का यह भी मतलब है कि जहां पहुंचना था, वहां पहुंच गए हैं। इस तरह के अनेक इस्तेमाल हैं। राजनीतिक दलों ने इसके जरिये सदस्यता हासिल करने की तरकीब निकाली है।

जनवरी, 2014 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली कामयाबी के बाद मिस्ड कॉल के जरिये सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी। पार्टी का टारगेट था कि 26 जनवरी तक एक करोड़ सदस्य बनाने हैं। ऐसा कर पार्टी अखिल भारतीय उपस्थिति दर्ज कराना चाहती थी। इस अभियान का नाम रखा गया, ‘मैं भी आम आदमी’ और सदस्यता एकदम फ्री। पार्टी ने 10 रुपये का सदस्यता शुल्क हटा दिया था। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि आम आदमी 10 रुपये नहीं दे सकता, इसलिए हम इसे फ्री कर रहे हैं। तब इस मौके पर पार्टी नेता गोपाल राय ने दावा किया था कि भारत के इतिहास में पहली बार हो रहा है, जब कोई पार्टी अपनी सदस्यता के दरवाज़े इस तरह से खोल रही है। 07798220033 पर मिस्ड कॉल देकर कोई भी आम आदमी पार्टी का सदस्य हो सकता था। एसएमएस के जरिये अपना नाम, विधानसभा का नाम और एसटीडी कोड देकर सदस्य हो सकता है।

तब इस तरह की खबरें भी आने लगीं कि नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी भी आम आदमी पार्टी के सदस्य बन गए हैं। मज़ाक के तौर पर ही सही, लेकिन तब कुछ लोगों ने कहा था कि मिस्ड कॉल से जो सदस्य बनेगा, उस सदस्यता का क्या मतलब है। सदस्यता मुफ्त में ऐसे बांटी गई, जैसे दिल्ली में फरवरी और अगस्त के महीने में सेल लगती हो। किसी पार्टी का सदस्य होना इतना आसान हो गया कि कोई नियम-कानून नहीं, विचारधारा का प्रचार या संज्ञान नहीं, बस मिस्ड कॉल दीजिए और बन जाइए पार्टी का मेंबर। हालांकि आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि ऑनलाइन फॉर्म भरकर भी सदस्य बना जा सकता है। जिनके पास मोबाइल फोन नहीं है, वे अपने वोटर आईकार्ड का नंबर देकर सदस्य बन सकते थे। तब अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में इसे ‘गिमिक’, यानि प्रपंच बताया था और कहा था कि ऐसे ‘गिमिक’ के दूरगामी असर नहीं होते हैं।

बीजेपी ने भी 1 नवंबर से मिस्ड कॉल से अभियान शुरू किया है। 1800 266 2020 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर कोई भी बीजेपी का सदस्य बन सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स में भावना विज अरोड़ा ने लिखा है कि बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनना चाहती है। इसके लिए पार्टी ने मार्च, 2015 तक नौ करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के आठ करोड़ सदस्य हैं। बीजेपी उससे भी आगे निकलना चाहती है। यह साफ नहीं है कि चीन से बड़ी पार्टी बनकर बीजेपी क्या साबित करना चाहती है। चीन में सत्ता पार्टी के अनुसार नहीं बदलती है, सिर्फ नेता बदलता है। चीन में 1949 से लेकर आज तक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का ही शासन है। कहने के लिए वहां आठ और पार्टियां भी हैं, जो कानूनी मान्यता प्राप्त हैं। बीजेपी का ऐसा मकसद है या नहीं, अभी साफ नहीं है।

अभियान से पहले बीजेपी के साढ़े तीन करोड़ सदस्य थे। बीजेपी ने अपने अभियान के पहले ही महीने में एक करोड़ मिस्ड कॉल वाले सदस्य बना लिए हैं। नौ करोड़ का लक्ष्य तय करने के लिए बीजेपी को अगले चार महीने में आठ करोड़ सदस्य बनाने होंगे, यानि हर महीने दो करोड़। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 17 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। भारत में 93 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास मोबाइल सेट हैं, सो, उस हिसाब से नौ करोड़ मिस्ड कॉल कोई नामुमकिन लक्ष्य नहीं है। बीजेपी के लिए यह अभियान काफी गंभीर है। पार्टी की वेबसाइट पर इसके लिए कई भाषाओं में प्रमोशनल वीडियो और ऑडियो हैं। गली-गली में पोस्टर लगे हैं और रेडियो पर खूब विज्ञापन आ रहे हैं।

ऐसे ही एक विज्ञापन में एक सिख युवा युवाओं से कह रहा है, “देश तो मोदी जी बदल ही रहे हैं न… और हम क्या कर रहे हैं… उन्हें लाइक कर रहे हैं, कमेंट कर रहे हैं… मैं जा रहा हूं देश बदलने… भाजपा से जुड़ने, और आप…” यही लाइक-कमेंट करने वाली जमात है, जिसे बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने अपनी राजनीतिक पूंजी के रूप में देखा है। अब इसी जमात को एक किस्म की लानत भी भेजी जा रही है कि आप सिर्फ कमेंट ही कर रहे हैं। देश बदलना है तो बीजेपी से जुड़ना होगा।

संवाद के मामले में जितनी महारत और सोच हमारे राजनीतिक दलों की है, वह किसी विज्ञापन एजेंसी के पास भी नहीं होगी। एक और बदलाव आया है। नरेंद्र मोदी ने राजनीति की शब्दावली में नंबर को प्रमुख बना दिया है। नंबर का इस्तेमाल करने से हासिल बड़ा लगने लगता है। वर्ना आम आदमी पार्टी ने पहले सोचा ज़रूर कि मिस्ड कॉल से सदस्यता बनाई जा सकती है, लेकिन नरेंद्र मोदी ने नंबर के स्केल पर ले जाकर उसे और आकर्षक बना दिया। बीजेपी को नौ करोड़ सदस्य चाहिए, ताकि वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से भी बड़ी पार्टी बन जाए।

हमारे देश में राजनीतिक सदस्यता का इतिहास सौ साल से ज्यादा का नहीं होगा। गांधी ने कांग्रेस के लिए चार आने की सदस्यता निर्धारित की थी। साथ में कई शर्तें भी थीं। वर्ष 2006 में ‘टेलीग्राफ’ अखबार में एक लेख छपा, जिसमें कहा गया कि अर्जुन सिंह को पता था कि सोनिया गांधी कांग्रेस की चार आना सदस्य भी नहीं थीं, प्राथमिक सदस्य भी नहीं थीं। कांग्रेस में सदस्यता दो प्रकार की होती थी – प्राथमिक और सक्रिय। प्राथमिक सदस्य ही आगे चलकर सक्रिय सदस्य होता था। बशर्ते उसने 25 और लोगों को सदस्य बनाया हो और पार्टी के लिए लगातार दो साल तक काम किया हो। वर्ष 2010 में कांग्रेस ने इस नियम को बदल दिया और दो चरणों की सदस्यता प्रणाली समाप्त कर दी। हिन्दू अखबार की रिपोर्ट बताती है कि केरल में कांग्रेस पार्टी ने इस अगस्त से सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी, जो 31 दिसंबर तक चल रही है, मगर यह अभियान मिस्ड कॉल से नहीं है। अखबार के अनुसार कांग्रेस के नेताओं को घर-घर जाकर सदस्य बनाने होंगे।

इसी तरह से शुरुआती दौर में बीजेपी या अन्य दलों की भी ऐसी ही सदस्यता प्रक्रिया होगी, जहां सदस्यता ग्रहण करने का एक खास मतलब होता होगा। बीजेपी की वेबसाइट पर सदस्यता वाले कॉलम को क्लिक करने पर एक पूरा पर्चा भी खुलता है, जिसमें पार्टी की यात्रा से लेकर सिद्धांतों तक के बारे में बताया गया है। इसमें बीजेपी का सदस्य होने वालों के लिए पंचनिष्ठाएं बताई गई हैं – राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय एकात्म लोकतंत्र, सामाजिक, आर्थिक समस्याओं के प्रति गांधीवादी दृष्टिकोण, समतायुक्त शोषणमुक्त समाज की स्थापना, सकारात्मक सेक्युलरवाद, मूल्यों पर आधारित राजनीति – लेकिन मिस्ड कॉल मारने वाला कहां यह सब पढ़ेगा। वह तो बस समर्थक से सदस्य बन जाएगा।

मगर सदस्यता के मामले में मिस्ड कॉल का आगमन बता रहा है कि हमारे राजनीतिक दल बदल रहे हैं। 25 सदस्य बनाने का फॉर्मूला कुछ वैसा ही है, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफाई अभियान के लिए नौ सदस्यों को मनोनीत करते हैं, और वे नौ सदस्य आगे नौ-नौ को मनोनीत करते हैं। इसी फॉर्मूले पर कुछ साल पहले संतोषी माता या वैष्णो देवी के नाम से छपा पोस्टकार्ड आता था, जिसमें लिखा होता था कि अगर 25 या 50 लोगों को नहीं भेजा तो माता का कोपभाजन बनना पड़ेगा।

कार्यकर्ता और मिस्ड कॉल से बने सदस्य में क्या अंतर है, यह तो इन दलों को ही साफ करना होगा। रविवार को बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने रामदेव को लेकर एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव बीजेपी के चवनिया सदस्य भी नहीं हैं। पटना में मोदी ने कहा कि रामदेव बीजेपी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं, तब उनकी बातों को बीजेपी के खाते में कैसे डाला जा सकता है। सुशील मोदी से पत्रकारों ने सवाल किया था कि रामदेव ने कहा था कि 100 दिन में काला धन आ जाएगा। अब यह भी साफ नहीं है कि मिस्ड कॉल वाले प्राथमिक सदस्य बन रहे हैं या नहीं।  सदस्यता से उन्हें बीजेपी के भीतर किस प्रकार के अधिकार मिलते हैं, यह भी साफ नहीं है। भविष्य में इन सदस्यों के आचरण के प्रति बीजेपी का क्या स्टैंड होगा। क्या पार्टी इन्हें सुविधानुसार वैसे ही खारिज कर देगी, जैसे सुशील मोदी ने रामदेव को कर दिया।

मिस्ड कॉल की सदस्यता के बारे में समझ साफ होनी चाहिए। क्या मिस्ड कॉल वाले सदस्यों को पार्टी के आंतरिक चुनावों में मतदान करने का अवसर मिलेगा। अगर वे पार्टी से किसी तरह नाराज़ हुए तो मिस्ड कॉल से ली हुई सदस्यता कैसे वापस करेंगे। क्या वह एक बार मिस्ड कॉल देने से हमेशा के लिए सदस्य बन जाएगा। कई लोग होते किसी और दल के सदस्य हैं, लेकिन किसी और दल के नेता से प्रभावित होकर दूसरे दल को वोट कर देते हैं। अगर एक ही फोन से कोई बीजेपी के टोल फ्री नंबर में मिस्ड कॉल देकर सदस्य बन जाए और उसी से आम आदमी पार्टी का तो इसे किस सॉफ्टवेयर की सूप या छलनी से अलग किया जाएगा। मिस्ड कॉल की सदस्यता को लेकर कई सवाल हैं। क्या पता, इसका भी जवाब एक दिन मिल जाए।