ललित ही प्रचलित है, बाकी सब विचलित हैं। ललित मोदी की शान में एक आरती

Lalit Modi

हे ललितात्मा ,

आप उच्चतम कोटी के आत्मा हैं । आप अनेक शरीर में वास करते हैं । आप अजर हैं, अमर हैं और साक्षात हैं । आप पहले आत्मा हैं जिसे देखा जा सकता है ।  छूकर महसूस किया जा सकता है । आप ही जगतात्मा हैं । आप वसुंधरा में भी हैं, आप सुषमा में भी हैं । आप शरद में भी हैं, आप राजीव में भी हैं । आप जहाँ नहीं हैं, वहाँ कुछ नहीं है । आप उसमें नहीं हैं, जो कुछ नहीं है । आप ही भारत हो, आप ही मोन्टिनिग्रो । आप ही चाइना, आप ही अर्जेंटीना । जिसमें ललित नहीं है, वो जगत में नहीं हैं । इसलिए हमने आपकी शान में एक आरती लिखी है । गद्य और पद्य को मिक्स किया है, पहली बार लाइफ़ में रिस्क लिया है ।

आप मुस्कुराते हैं तो दूसरे हंस नहीं पाते । आप भागते हैं तो दूसरे फँस जाते हैं । सब आपसे ध्यान हटाना चाहें. आप हैं कि ध्यान दिलाना चाहें । आप ललित नाटक भी हो और आप ही अकादमी । आप मोदियों के मोदी हो, शुक्लाओं के शुक्ला । आप ही हल्ला, आप ही गुल्ला । आप ही पंडत, आप ही मुल्ला । आप ही हलफ़नामा, आप ही पैमाना । आप ही मयखाना, आप ही तहख़ाना । आप का प्रभाव ही बाक़ियों का अभाव है । मज़बूत सरकार का घट गया भाव है । पहले जैसा आव है न ताव है । माँगा जाता है इस्तीफ़ा, बढ़ा देती है वज़ीफ़ा । हर छोटे मुल्कों के दिवस पर बधाई संदेश आ रहा है, मांग कर थक गए सफाई संदेश नहीं आ रहा है ।

मैं यह आरतीनुमा पत्र उम्मीद से लिख रहा हूँ । बुलाने को लिए नहीं बताने के लिए लिख रहा हूँ । भारत में जो ललित होगा उसी के कर्मों का फलित होगा । आप कर्मों के कर्म हैं, धर्मों के धर्म हैं । आप दलों के दल हैं, दलदल में कमल हैं । आप नाथों के नाथ हैं, आप हाथों के साथ हैं । आप के ईमेल में सब बेमेल हैं । आपके हर मेल में कैसे कैसे खेल हैं । आप ही उजागर हो,आप ही विधाता । ललित ही प्रचलित है बाकी सब विचलित हैं ।

आप ही आरोपी, आप ही प्रत्यारोपी । आप ही सांसारिक ,आप ही पारिवारिक । आप ही भ्रष्टाचार, आप ही सदाचार । आप ही अट-पट, आप ही लट-पट । आप ही लंपट, आप ही चंपत । आप मिले तो भागे संकट, आप भागे तो आवे संकट । आप ही मंजन, आप ही गंजन । आप ही से संसार है, मोदी मोदी जपे सब, आप ही मोदी सरकार हैं । ललित बिगाड़े सबके काम, ललित बनावे सबके काम । करे उजागर सबके राज़, काँपे थर थर सब सरकार ।

पत्र पढ़ते ही पत्र मत लिखना । पढ़ते पढ़ते मत हँसना ।  जो ललित में है वही लंदन में है । जो ललित से है वही लिस्बन में है । तनिक तुम हम में भी वास करो, तनिक हमको भी लेकर प्रवास करो । हमको घुमाओ लिस्बन-लंदन, हमको कराओ रस रंजन । जो भी ललित की आरती करेगा, हर संकट से जल्दी बचेगा । खूब लूटो,खूब खिलाओ पर ललित की आरती दस बार गाओ । ललित ही वाचाल हैं, बाकी सब पाताल हैं । ललित ही उपाय है, बाकी सब बलाय है ।

( नोट- जो इस आरती को बीस बार शेयर नहीं करेगा, गाकर दोस्तों को नहीं बतायेगा, वो लंदन क्या जलंधर भी नहीं जा पायेगा । आरती के बाद ज़ोर से बोलें, बोलो रवीश कुमार की जय । )

अंत में हे आदरणीय ललित मोदी, आपकी ललित लीला अपरंपार है । आप सदा सुखी रहें पर थोड़ा एडजस्ट कीजिये ताकि हम भी सुखी रहें ।

आपका,

वन एंड ओनली रवीश कुमार