राकेश सिन्हा के बहाने कुछ बातें

राकेश सिन्हा हर दूसरी रात टीवी चैनलों के तमाम पैनलों में आते हैं। संघ की विचारधारा खुलकर रखते हैं जिन्हें लेकर घोर वाद-विवाद भी होता है। यही तरीका है कि जो बात ठीक न लगे उसका जवाब बात से ही दिया जाए। राकेश इस मामले में कभी पीछे नहीं हटते हैं। सामने से बहस करते हैं। वो बहस में हारते भी हैं, जीतते भी हैं और अड़े भी रहते हैं। जो भी हैं वो सबके सामने हैं।

कोलकाता में किसी मनोज कुमार ने राकेश सिन्हा के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्हें आशंका है कि राकेश सिन्हा के कथित रूप से शेयर किए गए किसी ट्वीट या तस्वीर के कारण बंगाल में कभी भी दंगा हो सकता है। राकेश ने हिन्दू भावना भड़काने वाली तस्वीरें साझा की हैं। ऐसी स्थिति में मनोज अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं और चाहते हैं राकेश सिन्हा के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हो। शायद ग़ैर ज़मानती वारंट भी जारी हो गया है।

यह सब एफ आई आर में लिखा है जिसके बारे में मीडिया में कहीं कहीं छपा भी है। राकेश दो साल से बंगाल नहीं गए हैं। क्या तस्वीर है, मुझे नहीं मालूम, उनके किस ट्वीट से सांप्रदायिक तनाव भड़कने वाला था,मैं ख़ुद देखना चाहूँगा। राकेश का कहना है कि एक तस्वीर में अपनी माँ के साथ पूजा कर रहे हैं। उससे किसी को क्या आपत्ति हो सकती है?

ठीक है कि आज की राजनीति में वकीलों और थानों की बहुत भूमिका हो गई है। जहाँ तहाँ भावना के ठेस पहुँचने पर मुक़दमा करने वाले वकीलों ने उत्पात मचाया हुआ है। यह तरीका किसी के लिए ठीक नहीं है। हम पत्रकार भी भुगत रहे हैं। इसलिए ममता सरकार या किसी भी सरकार को राजनीति के लिए एफ आई आर के इस्तमाल से बचना चाहिए। वे शांति बहाली के लिए कुछ भी कदम उठा सकती हैं मगर पहली नज़र में एफ आई आर की कापी देखकर लगता है कि मामला बनावटी है। ये क्या तरीका हुआ कि किसी पर केस मुक़दमा कर दो, बंगाल बुलाते रहो। राकेश सिन्हा की बात से जो भी आपत्ति है उसे किसी भी बहस में चुनौती दी जा सकती है।

ममता बनर्जी ने फेक न्यूज फैलाने वालों को पकड़ने का साहस दिखा कर बढ़िया काम किया है,बहुत पहले उन्हें या किसी भी सरकार को यह काम करना चाहिए था। केंद्र सरकार से तो उम्मीद बेकार है। फेक न्यूज की वेबसाइट कौन चलाता है, उनसे बेहतर कौन जानता होगा। मगर कार्रवाई करने के नाम पर किसी को भी और किसी भी बात पर निपटा देने का खेल बहुत हो गया। इसका कोई अंत नहीं है। बंगाल पुलिस को सारे तथ्य सामने रखने चाहिए ताकि मामला साफ हो। यह नहीं हो सकता कि दूसरों के लिए बोला जाए और राकेश सिन्हा के लिए चुप रहा जाए। राकेश सिन्हा की जगह वहाँ सक्रिय दूसरे तत्वों पर ममता को निगाह रखनी चाहिए। पुलिस भेजकर परेशान करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

साथ ही प्राथमिकी दर्ज कराने वाले मनोज जी से भी कहना चाहिए कि आप अपनी आस्था संभाल कर रखिये। फोटो-फाटू देखकर उबलने वाले मूर्ख होते हैं। आप जैसों को दवा की ज़रूरत है। किसी भी मज़हब में आस्था को लेकर आहत होने वाले मूर्खों की फौज घातक है। इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। सबका इलाज ज़रूरी है। मगर इलाज के नाम पर धरपकड़ की राजनीति में उच्च स्तरीय सतर्कता बरते जाने की जरूरत है। फ़िक्सिंग से माहौल बिगड़ता ही है।