प्रधानमंत्री जी कौन सा आंकड़ा सही है- 50 करोड़, 10,000 करोड़ या 20,000 करोड़

पटना में प्रधानमंत्री के बयान के बाद से इस खोजबीन में लगा था कि दस हज़ार करोड़ की बात कहां से आई? क्या इसका ज़िक्र बजट में है? यूजीसी की वेबसाइट पर इसका जवाब तो मिला मगर कई और सवालों में उलझता चला गया।

आप जानते हैं कि 2016-17 के बजट में कहा गया था कि 20 भारतीय यूनिवर्सिटी को दुनिया की सौ टॉप यूनिवर्सिटी में पहुंचाने के लिए रेगुलेटरी आर्किटेक्टर बनाया जाएगा। इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया है। 2017-18 के बजट में उच्च शिक्षा के खंड में इसका ज़िक्र नहीं है मगर व्यय वाले हिस्से में यानी पेज 186 पर इसके लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
हम यही सोच रहे थे कि बजट में 50 करोड़ है तो 10,000 करोड़ जितनी बड़ी राशि का ज़िक्र कैसे आ गया ? क्या इतनी बड़ी राशि के लिए संसद की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं है?

यूजीसी ने 12 सिंतबर 2017 तक बीस ‘संस्थानों’ से 90 दिनों के भीतर आवेदन जमा करने का विज्ञापन निकाला है। इसमें दस सरकारी और दस प्राइवेट संस्थान नहीं लिखा है। प्रधानमंत्री ने तो साफ साफ कहा था कि दस प्राइवेट और दस सरकारी होंगे। इतनी अहम बात यूजीसी के विज्ञापन में नहीं है। ये कैसे हो सकता है?

इसके बाद हमने और अमितेश ने यूजीसी की गाइडलाइन्स चेक की। गाइडलाइन्स के पारा 6.2 पढ़ा जिसमें कहा गया है कि सरकारी संस्थानों को उनकी योजना का 50 से 70 फीसदी दिया जाएगा या 1000 करोड़ तक दिया जाएगा। यह राशि प्रत्येक संस्थान को पांच साल में दी जाएगी। यहां पर भी संस्थानों की संख्या साफ-साफ नहीं दी गई है। सिर्फ सरकारी संस्थान लिखा है। सरकारी संस्थान की संख्या नहीं दी गई है। प्राइवेट संस्थान की तो बात ही नहीं है।

क्या संस्थानों की संख्या जानबूझ कर छोड़ी गई है? फिर भी हम प्रधानमंत्री के भाषण पर भरोसा करें तो 1000 करोड़ के हिसाब से 20 संस्थानों को पांच साल में 20,000 करोड़ मिलना चाहिए।

लेकिन प्रधानमंत्री ने तो 10,000 करोड़ बोला था। क्या प्रधानमंत्री ने अपने स्तर पर बजट कम कर दिया?

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यूजीसी की वेबसाइट पर एक पुरानी गाइडलाइन्स मिलती है, जो मानव संसाधन मंत्रालय की है और 2016 की है। दोनों ही गाइडलाइन्स यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है। कायदे से पुरानी गाइडलाइन्स को वेबसाइट से हटा देना चाहिए था। जब नई गाइड लाइन्स के हिसाब से विज्ञापन आया है तो पुरानी वेबसाइट रखने का क्या मतलब?

2016 की गाइडलाइन्स में लिखा है कि अपनी योजना सौंपने वाले हर संस्थान को पांच साल तक 500 करोड़ की राशि दी जा सकती है। इस हिसाब से इस योजना का कुल बजट हुआ 1,000 फिर यूजीसी ने 500 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ कब कर दिया, तो क्या प्रधानमंत्री को पता नहीं चला?

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यही नहीं, इस मामले में भारत सरकार ने एक गजट भी प्रकाशित किया है। इसकी तारीख है 29 अगस्त 2017। इस गजट के अनुसार निजि विश्वविद्यालयों को किसी राशि का आवंटन नहीं किया जाएगा। लेकिन परियोजना के लिए जो सरकारी राशि होगी, उसका इस्तमाल वो कर सकती हैं। इससे यही समझ आता है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी सरकार से रिसर्च के लिए ग्रांट ले सकती हैं या उन्हें मिलने लगेगा। मगर चोटी की 20 यूनिवर्सिटी में पहुंचने के लिए सरकारी यूनिवर्सिटी के साथ पैसा नहीं मिलेगा।

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फिर वही बात। प्रधानमंत्री ने तो कहा है कि 10,000 करोड़ में से 10 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को भी मिलेगा। यही बात यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय की वेबसाइट पर भी है। तो सरकार का गजट, जो अंतिम और प्रमाणिक दस्तावेज़ माना जाता है, उसमें क्यों लिखा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी को पैसा नहीं देंगे। यह गजट भी यूजीसी की वेबसाइट UGC.AC.IN पर मौजूद है। मतलब एक ही संस्थान की वेबसाइट पर तीन तीन तरह के दस्तावेज़ हैं। पैसे को लेकर तीन-तीन तरह के दावे हैं।

समझना मुश्किल है कि कौन सही बोल रहा है। प्रधानमंत्री ग़लत बोल रहे हैं या उन्हें ग़लत जानकारी दी जा रही है, यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय ने अलग अलग गाइडलाइन्स क्यों जारी की है, अगर गाइडलाइन्स एक ही है तो एक में राशि 500 करोड़ क्यों है और एक में 1000 करोड़। क्या इतनी आसानी से 10,000 करोड़ से 20,000 करोड़ हो जाता है? सिम्पल सा सवाल है प्रधानमंत्री जी, क्या आप मानव संसाधन मंत्री से पूछ सकते हैं कि जिसका एलान आपने इतनी ज़ोर-शोर से किया, उसे साफ शब्दों में एक जैसा क्यों नहीं प्रकाशित किया गया ?