• मैंने अविनाश की अनारकली देख ली

    मैंने अविनाश की अनारकली देख ली

    मैं आख़िरी सीन की स्वरा को बहुत दिनों तक अपनी आँखों में बंद रखना चाहूँगा। उस आख़िरी सीन को जब सत्ता की महफ़िल को खंडहर की तरह छोड़कर अनारकली रात अंधेरे में अकेले चलने लगती है। पूरी फिल्म में लोगों से घिरी रहती है। लोग उसका जिस्म नोचते हैं। लोग उसके गीतों को हवस समझते हैं। लोग उसके गीतों को प्यार करते हैं। लोग उसे जिस्म का धंधा करने वाली कहते हैं। लोग जो चुपचाप रहते हैं जब गुंडे अनारकली का पीछा करते हैं। उन तमाम लोगों को एक जगह जमा कर अनारकली उन्हें ध्वस्त कर देती है। इसलिए उसका अकेले चलना फिल्म का शानदार पल है। असहाय दर्शक ताकत महसूस करने लगता है। आज के दौर में निराशा से जूझ रहे लोगों को अनारकली बिना कहे बोल देती है कि जिससे डर लगता है, उस पर पूरी तैयारी से और अकेले हमला करो। जीत जाओगे।


  • यूपी की जूलियटों के नाम एक पत्र

    यूपी की जूलियटों के नाम एक पत्र

    यूपी की जूलिएटो, तुम पार्क में बेशक जाओ। वहां के पेड़ों से प्रेम करो। पक्षियों से प्रेम करो। घासों और पत्तियों से प्रेम करो। अशोक से प्रेम करो, यूकिलिप्टस से प्रेम करो। प्रेम करने के लिए कितना कुछ है। ज़रूरी नहीं है कि तुम ‘प्रेम’ ही करो। मेरी बात मानो तो तुम यूपी के रोमियो को आज़ाद कर दो। उनमें आवाज़ उठाने का दम नहीं है। वे तुमसे चोरी चुपके अपराधी की तरह मिलने आएंगे। जो मुलाकात तुम्हें अपराधी बनाए या तो उसका विरोध करो या फिर छोड़ दो। प्रेम में एक बात का ख़्याल रखना। रोमिया चाहे कितना भी स्मार्ट क्यों न हो, उसकी अंग्रेज़ी चाहे कितनी अच्छी क्यों न हो वो अगर बुज़दिल है तो वो प्रेमी नहीं है। वो अगर बाग़ी नहीं है तो प्रेमी नहीं है। वो मूर्ख है। वाहियात है। ऐसी जवानी पर लानत भेजो। अपनी जवानी पर भी तोहमत भेजो।