प्रति डॉलर निवेश पर मुनाफ़े में पाकिस्तान भारत से कहीं आगे हैं

image

बिजनेस की ख़बरों में आप अक्सर ब्लूमबर्ग का नाम सुनते होंगे। महान है या नहीं, ये तो पता नहीं मगर इस एजेंसी ने एक डेटा चार्ट जारी किया है। उभरती हुई अर्थव्यवस्था को आसमानी रंग में दिखाया है और विकसित अर्थव्यवस्था को हल्के पीले रंग में। इस चार्ट को अमरीकी डॉलर के निवेश पर होने वाले मुनाफ़े के आधार पर बनाया गया है। यह ध्यान में रखना चाहिए कि हर एजेंसी का दावा और आधार अलग अलग होता है।

ब्लूमबर्ग ने 1997 से 2016 के बीच हर साल दुनिया की चोटी की दस अर्थव्यवस्थाओं का चार्ट बनाया है। आप इस चार्ट में उन देशों का नाम देख सकेंगे जिनका भारतीय मीडिया कभी ज़िक्र तक नहीं करता है। इस चार्ट में उभरते भारत को सिर्फ तीन बार स्थान मिला है।2003 में भारत का स्थान नौंवा था। 2009 में दसवाँ था और 2014 में सबसे अच्छा चौथा।

2015 और 2016 के साल में भारत का चोटी के दस उभरते हुए और विकसित बाज़ारों में नाम तक नहीं है। भारत के अख़बारों में भारत को इस तरह पेश किया जाता है जैसे हम वाक़ई चोटी की अर्थव्यवस्था हों। इस सूची के हिसाब से नहीं हैं। अब मैं यह बताने में सक्षम नहीं हूँ कि डालर के निवेश पर मुनाफ़े का पैमाना कितना बड़ा पैमाना है लेकिन आपने नेताओं के मुखमंडल से कई बार सुना होगा कि भारत की अर्थव्यवस्था की धूम है इसलिए विदेशी निवेशक पैसा डालने को लालायित हैं।वही नेता आपको यह नहीं बता रहे हैं कि आजकल विदेशी निवेशक अपना पैसा भारत से निकालकर दूसरी जगह क्यों ले जा रहे हैं।

2016 के साल में जिन दस देशों के नाम हैं।ब्राज़ील,कज़ाख़िस्तान,पेरू,रूस,पाकिस्तान,नांबिया,
हंगरी,मोरक्को,कोलंबिया और दसवें नंबर पर बुल्गारिया।2014 में पाकिस्तान का नाम है और चोटी के दूसरे बाज़ार के स्थान पर है। भारत से दो स्थान आगे। फिर 2015 में पाकिस्तान का नाम गायब है। 2016 में है। पाँचवें नंबर पर है।

क्या भारत के किसी अख़बार में कभी कुछ भी मिला है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था क्यों अच्छा कर रही है और वहाँ क्या हो रहा है। उनका वित्त मंत्री कौन है? अख़बार और टीवी देखने का मतलब यह नहीं है कि आप जानते ही हैं।भारतीय मीडिया आपकी जानकारी का विस्तार नहीं करता है।उसके पास संसाधन नहीं होता,होता भी है तो इन बातों पर ख़र्च नहीं करता और उसे अच्छी तरह पता है कि आपको जो पता है उसी में मस्त रहते हैं।

इसलिए ज़रूरी है कि बिजनेस ख़बरों को ध्यान से पढ़ें । इनमें डेटा को लेकर जो खेल होता है,उसे समझें।सबको पता है कि किसी के पास कोई समय नहीं है। हम भी जानकारी की जगह सिर्फ यही मान कर ख़ुश हैं कि नरेंद्र मोदी बेजोड़ हैं या बेकार हैं। यही रोज़ की ख़बर है और रोज़ का ज्ञान।