अमरीका की महाबली गाड़ियाँ

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ऑटोमोबिल ने अमरीका का इतिहास भी बदला है और यह अमरीकी राष्ट्रवाद के प्रसार का वाहन भी रहा है । जरूर इसके बारे में काफी कुछ लिखा गया होगा । अमरीका जाते ही आप सबसे पहले वहाँ की गाड़ियाँ देखते हैं । मुझे तो हर दूसरी गाड़ी पहले से ऊँची नज़र आने लगी । हम मारुति 800 और ऑल्टो कार वाले देश के नागरिक तो पहली नज़र में ही दहशत में आ जाते होंगे । सुपर पावर की छवि दिमाग़ में बैठ जाती होगी । वाशिंगटन डी सी के एयरपोर्ट से निकलते ही ट्रकों और सामान्य कारों की ऊँचाई देखकर लगा कि वाक़ई सुपर पावर के यहाँ आ गए हैं । मुझे नहीं पता कि बाकी सुपर पावर मुल्कों की सड़कों पर भी ऐसी ही विशालकाय गाड़ियाँ चलती हैं या नहीं ।

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अमरीका में हमने कुछ ट्रक और बस ऐसे देखे जैसे सड़क पर अपार्टमेंट चलने लगे हों । ट्रकों का कान बड़ा बड़ा बनाया गया है । नीले रंग के ट्रक को देखिये । जानबूझकर इसका कान बाहर निकाला गया है ताकि ताक़तवर और बड़ा दिखे । लगे कि यह अमरीकी अर्थव्यवस्था का चेहरा है । भारत के गिफ़्ट स्टोर में दिल्ली का हरा पीला ऑटो बिकता है । अमरीका में बच्चे ऐसे ट्रकों और विशालकाय गाड़ियों की नक़ल में बने खिलौने से खेलते हैं ।

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इस ट्रक का थूथना फुला कर इतना बड़ा कर दिया गया है कि नीचे आने पर यह भारतीय ट्रकों की तरह कुचलेगा नहीं, निगल जाएगा । ऐसा लगता है कि एक पूरा ज़िला एक ट्रक में समा जाएगा । अमरीकी गाड़ियों को देखकर लगा कि नफ़ासत से इनका दूर दूर का नाता नहीं है । इनका काम अपने मुल्क की तरह ताकत का प्रदर्शन करना है ।

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तुलना के लिए भारतीय ट्रक की तस्वीर लगा दी है जो मैंने बंगाल में ली थी । इसका मुख देखिये । कितना गोल और सुंदर है । जैसे सड़क पर निकलने से ही डरता हो । अमरीकी ट्रकों का मुँह देखिये जैसे पूरी दुनिया को निगलने निकले हों । एक किस्म की आक्रामकता की अाभा अमरीकी ट्रकों के मुखमंडल पर नज़र आती है । कारें तो मूस की तरह मोटाई हुई लगीं ।

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आबादी के हिसाब से तो ऐसी गाड़ियाँ भारत में होनी चाहिए लेकिन हम लोग अब जाकर एस यू वी का शौक़ पालने लगे हैं । हमें छोटा होने का इतना शौक़ है कि बड़ी गाड़ियाँ बनाके बनाते छोटी एस यू वी बनाने लगे हैं । जलेदी ही ऑल्टो की बाहरी डिज़ाइन एस यू वी की तरह बना दी जाएगी । हमारे मुल्क में छोटी और दुबली पतली एस यु वी कारों का प्रसार किया जा रहा है । भारत की सड़कों पर गाड़ियों की जितनी विविधता है उतनी अमरीका की सड़कों पर नहीं है । भारत की गाड़ियों को देखकर लगेगा कि सबने अपने अपने सपने देखे हैं , अमरीका में सबके लिए किसी एक ने सपने देखे हैं ! अपनी गाड़ियों को महाबली बनाया है जबकि हम बाहुबली बनाने में लगे हैं । महाबली और बाहुबली में अंतर तो समझते ही होंगे । एक दादा और एक गुर्गा ।

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वहाँ की स्कूल बस पसंद आई । खूब मज़बूत और एक रंग की । भारत में तो ट्रक, ट्रैक्टर, टैम्पो, सूमो से लेकर मार्कोपोलो बस तक का इस्तमाल स्कूल बस के लिए होता है । अमरीकी स्कूल बस न सिर्फ खूबसूरत लगी बल्कि दिल भी आ गया । पुरानापन भी है और नयापन भी । न्यूयार्क की सड़क पर एक रिक्शा के भी दर्शन हुए । नुमाइश के तौर पर चलाया गया होगा । वैस साइकिल रिक्शा का आनंद लेना हो तो भारत और भारत से भी ज़्यादा बांग्लादेश जाइये ।

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अमरीका की कई कारों को देखा । बेढब तरीके से बनी हुई है । मारकर निकल जाने के भाव का प्रदर्शन करती लगीं । मौसम ने भी ऐसा बना दिया होगा। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की गाड़ियाँ भी फली फूली नज़र आती हैं । अमरीका एक मुल्क ही नहीं है । एक छवि भी है जो इन सबसे बनती है । पर हमारे जैसा बंदा पूछता है कि ज़रूरत है या ऐसे ही गाड़ियों को ज़रूरत से ज़्यादा विशालकाय बना दिये हो मुखिया जी ।