Daily Archives: March 5, 2017

  • हे बनारस के प्रियजन, तनिक हमें भी सुन लीजिये

    हे बनारस के प्रियजन, तनिक हमें भी सुन लीजिये

    टीवी और राजनीति का खेल समझिये। आयातित कार्यक्रम और भव्यता बनारस की अपनी रचनात्मकता पर थोपी जा रही है। उसकी राजनीतिक सहजता समाप्त की जा रही है।बनारसी लोगों की राजनीतिक चेतना पर उनका बस न रहे इसके लिए आइटम खोजे जा रहे हैं। नए नए सीरीयल बन रहे हैं। जिनमें बनारस का सेट तो है मगर बनारस नहीं है।