मिज़ाज

Ravish 2

सबसे मुश्किल काम है अपने बारे में लिखना । आपसे मेरा एक परिचय एक टीवी पत्रकार और एंकर का रहा है । इस पेशे के अलावा मेरा दूसरा परिचय क़स्बा ब्लाग से ही बनता जिसके शुरू होते ही मैं ब्लागर पुकारा जाने लगा । इस ब्लाग ने मुझे जगहों को भरने का मौक़ा दिया जो टीवी में काम करते वक्त ख़ाली रह जाते हैं । गली मोहल्लों की तस्वीरें खींचना, मकान दुकान से लेकर नदी नालों की तस्वीरें चस्पाँ करना और उनके बहाने रिपोर्ट की शैली में कुछ कहना । अब यह ब्लाग एक वेबसाइट में बदल गया  है ।

मैं एक सरल इंसान हूँ मगर आप लोगों की तरह अनेक अंतर्विरोधों से भरा हुआ भी । आपको मेरे लिखे और जीये में अंतर दिख सकता है मगर किसी प्रयोजन के तहत ऐसा करने का प्रयास नहीं करता । समाज और खुद के अंतर्विरोधों से टकराना ही तो व्यक्तित्व और नज़रिये का सतत विकास है ।

देखने का ग़ज़ब का शौक़ है । शौक़ ए दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर । इस एक पंक्ति से मुझे मेरे जीवन का सार मिला है । वो शौक़ न होता तो मैं होता न ये ब्लाग और अब ये वेबसाइट । आते रहियेगा । बताते रहियेगा । मैं नए नए रास्ते पर चलना चाहता हूँ । जिसका पता सफ़र में निकलने से पहले मालूम न हो ।