मज़हब के मसले

यदि हिन्दू मुसलमानों के दिलों में ग़ुबार भरा हुआ है, तो वे खुलकर अच्छी तरह लड़ लें और अपने मन की निकाल लें किंतु इस ढंग से लुक-छिपकर नहीं, अंधेरे उजाले में छापा मारकर नहीं, निहत्थों पर धावा बोलकर नहीं, पूजास्थलों को भ्रष्ट करके नहीं, लुटेरों की भाँति दुकानें लूटकर नहीं, वीरों की भाँति अखाड़े में आ जाएँ और मर्दाने दाँव-पेंच से दुनिया के सामने अपनी सारी कसर निकाल लें । इससे बड़ा लाभ होगा । दिल धुल जायेंगे । इधर और उधर दोनों तरफ़ के वीर लोग मित्र हो जाएँगे, दोनों ओर के गुंडों व बदमाशों दब जाना पड़ेगा, उन्हें फिर धर्म रक्षक और ग़ाज़ी बनने का मौक़ा न मिलेगा । देश में भलमनसाहत का राज्य हो जाएगा और लोग व्यर्थ की लड़ाइयाँ छोड़कर उन लड़ाइयों के लड़ने में अपनी शक्ति लगायेंगे , जिनमें लगाने की ज़रूरत है ।

(( स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी का प्रताप में छपे एक लेख का अंश । प्रभात प्रकाशन ने गणेश शंकर विद्यार्थी पर दो खंड का संस्मरण छापा है । ))